घनसाली, हिम खबर संवाददाता। भिलंगना प्रखंड अंतर्गत द्वारी गांव निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विद्या दत्त बडोनी को ग्रामसभा जखन्याली में उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। श्री बडोनी 1970 से 1978 तक जखन्याली प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रुप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा वे टिहरी जिले में कई अन्य विद्यालयों में भी शिक्षक के रुप में कार्यरत रहे हैं। श्री बडोनी को आज भी एक उत्कृष्ट शिक्षक के रुप में याद किया जाता है। प्राथमिक विद्यालय जखन्याली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें उत्कृष्ठ शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। प्राथमिक विद्यालय जखन्याली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें श्रेष्ठ गुरु के रूप में और उनकी धर्मपत्नी कमला देवी को गुरु माता के रूप में सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह में उनके द्वारा पढ़ाए गए अनेक शिष्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर उनके साथ राम प्रसाद नौटियाल, पारेश्वर बडोनी को भी सम्मानित किया गया।
द्वारी गांव निवासी श्री बडोनी स्वर्गीय हरि राम बडोनी एवं स्वर्गीय सुरेशी देवी बडोनी के सुपुत्र हैं। उनका जन्म वर्ष 1947 में ग्राम द्वारी में एक गरीब परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय द्वारी में हुई। इसके पश्चात उन्होंने वर्ष 1967 में राजकीय इंटर कॉलेज, घुमेटीधार से हाईस्कूल की शिक्षा प्राप्त की। पारिवारिक आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उन्होंने वर्ष 1967 में बी.टी.सी. की शिक्षा ग्रहण की और उसके बाद वर्ष 1968 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक पद पर उनका चयन हुआ। उन्होंने 1970 से 1978 तक प्राथमिक विद्यालय जखन्याली में प्रधानाध्यापक के रूप में अपना बहुमूल्य समय प्रदान किया। अध्ययन के प्रति उनकी अत्यंत गहरी लगन थी, इसलिए उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। उन्होंने निजी माध्यम से दो बार इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा राजकीय इंटर कॉलेज, घुमेटीधार से वर्ष 1972 एवं 1974 में उत्तीर्ण की। इसके पश्चात शिक्षा के प्रति अपनी निरंतर लगन बनाए रखते हुए उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के टिहरी परिसर से वर्ष 1984 में प्राइवेट स्नातक (बी.ए.) की उपाधि प्राप्त की। शिक्षा के क्षेत्र में वे एक उच्च कोटि के शिक्षक के रूप में जाने जाते हैं। उनके द्वारा पढ़ाए गए छात्र आज अनेक उच्च पदों पर कार्यरत हैं। उनके 1000 से अधिक शिष्य शिक्षक बने हैं, जबकि अनेक शिष्य डॉक्टर, इंजीनियर, सिविल सेवाओं में तथा कुछ व्यवसायी के रूप में भारत एवं विदेशों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। आज भी उनके द्वारा पढ़ाए गए शिष्य गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उन्हें स्मरण करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने अपने जीवन का एक लंबा और महत्वपूर्ण समय शिक्षा क्षेत्र को समर्पित किया। उनकी सेवाएँ प्राथमिक विद्यालय से लेकर इंटर कॉलेज तक रहीं। उनकी नियुक्ति सितंबर 1968 में हुई तथा इंटर कॉलेज पटागली से वर्ष 2006 में सेवानिवृत्त हुए।