देहरादून। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा आयोजित उत्तराखंड की ऐतिहासिक भव्य रामलीला महोत्सव के सातवें दिवस को ‘गंगा-जमुना दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम और हनुमान जी का मिलाप, बाली वध तथा मेघनाद और हनुमान जी के बीच संवाद के रोमांचक प्रसंग प्रस्तुत किए गए। आधुनिक लेजर तकनीक के माध्यम से मेघनाद द्वारा हनुमान जी को नागपाश में बांधने का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया गया। वहीं, डिजिटल तकनीक से लंका दहन के भव्य मंचन ने दर्शकों को आकर्षित किया। डिजिटल स्क्रीन, लेजर इफेक्ट्स और ध्वनि तकनीक के माध्यम से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में टिहरी से तीन बार के विधायक किशोर उपाध्याय उपस्थित रहे।
‘गंगा-जमुना दिवस’ के माध्यम से समिति ने नदियों, हिमालय और प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। गंगा और यमुना केवल नदियां नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, आस्था और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार हैं। हिमालयी ग्लेशियरों का पिघलना, जलवायु परिवर्तन और नदियों में बढ़ता प्रदूषण गंभीर चिंता के विषय हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने हेतु हिमालयी ग्लेशियरों, नदी स्रोतों और जलधाराओं का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्य अतिथि टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय जी ने कहा कि श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करना एक बहुत बड़ा भगीरथ कार्य है। इस ऐतिहासिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए समिति और उसके अध्यक्ष अभिनव थापर का प्रयास सराहनीय है। भव्य लेजर तकनीक के बीच हनुमान जी को नागपाश में बाँधने जैसे प्रसंगों का जीवंत मंचन पारंपरिक रामलीला और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम है। ‘गंगा-जमुना दिवस’ के माध्यम से गंगा, यमुना, हिमालय और ग्लेशियरों के संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाना भी आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय ने कहा कि गंगा, यमुना और हिमालय का संरक्षण उत्तराखंड के भविष्य, पर्यावरणीय संतुलन और जनजीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। हिमालयी ग्लेशियरों, नदियों और प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने के लिए ‘हिमालय बचाओ’ की भावना को जन-आंदोलन बनाना आवश्यक है। रामलीला जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना एक सार्थक पहल है, ताकि हमारी सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके। ‘गंगा-जमुना दिवस’ के अवसर पर माँ शक्ति पिक्चर प्रोडक्शंस एवं फिल्म निर्देशक सुनील बडौनी द्वारा निर्मित गढ़वाली फिल्म ‘घस्यारी’ के ट्रेलर का भी लॉन्च किया गया। फिल्म ‘घस्यारी’ की कहानी गंगा-जमुना, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश को सामने लाती है। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून ने लोक कला, लोक संस्कृति और उत्तराखंड की क्षेत्रीय फिल्मों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रामलीला के मंच पर फिल्म के ट्रेलर को स्थान दिया। समिति का मानना है कि रामलीला जैसे बड़े सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकभाषा, लोककला और गढ़वाली सिनेमा को नई पहचान देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक विषयों पर जन-जागरूकता भी बढ़ाई जा सकती है।
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला वर्ष 1952 से हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है। टिहरी के जलमग्न होने के बाद इस ऐतिहासिक परंपरा को देहरादून में पुनर्जीवित कर नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया गया है। आधुनिक लेजर और डिजिटल तकनीक के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को भव्य रूप में प्रस्तुत करने के साथ समिति सामाजिक सरोकारों, पर्यावरण संरक्षण और उत्तराखंड की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश भी जन-जन तक पहुँचाना चाहती है। ‘गंगा-जमुना दिवस’ का उद्देश्य लोगों को नदियों, हिमालय और ग्लेशियरों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम में श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून के अध्यक्ष अभिनव थापर उपस्थित रहे। अतिथिगणों में टिहरी विधायक श्री किशोर उपाध्याय जी, राज्य मंत्री नितिन गौतम जी, परवादून कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल जी, फिल्म निर्देशक श्री सुनील बडौनी, माँ शक्ति पिक्चर प्रोडक्शंस के संस्थापक श्री परिणीत बडौनी, गढ़वाली फिल्म जगत के प्रसिद्ध कलाकार श्री रमेश रावत, श्री दिनेश बौड़ाई एवं श्रीमती भारती आनंद, डॉ. विनय कोहली, प्रदेश अध्यक्ष महिला कांग्रेस ज्योतिरादित्य राव सिंधिया, कांग्रेस नेता पीया थापा तथा माँ शक्ति पिक्चर प्रोडक्शंस के अन्य सदस्य सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राकेश भट्ट एवं भारती आनंद ने किया। गौरतलब है कि श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून द्वारा पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी बांध के कारण पुरानी टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित किया गया। वर्ष 2025 में इस रामलीला को डिजिटल माध्यमों पर 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा, जिसके साथ यह उत्तराखंड की सबसे अधिक देखी जाने वाली रामलीला बनी। वर्ष 2026 में समिति ने डिजिटल माध्यमों से एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा है।
भव्य रामलीला महोत्सव का आयोजन 8 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स, देहरादून में किया जा रहा है। रामलीला का मंचन 11 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक होगा। 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण एवं मेघनाद के पुतलों का दहन और 21 अक्टूबर को श्रीराम राजतिलक का भव्य आयोजन किया जाएगा। समिति ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से सपरिवार पहुँचकर रामलीला के भव्य मंचन का आनंद लेने तथा गंगा, यमुना, हिमालय और ग्लेशियरों के संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने की अपील की है।