1320 मेगावाट थर्मल पावर करार पर उठे सवालों का प्रमुख सचिव ऊर्जा ने दिया तथ्यात्मक स्पष्टीकरण

देहरादून। 1320 मेगावाट थर्मल पावर की प्रस्तावित बिजली खरीद प्रक्रिया को लेकर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों पर प्रमुख सचिव ऊर्जा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों, तकनीकी आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की स्वीकृति के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। बिजली खरीद का उद्देश्य किसी एक कंपनी को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि राज्य की दीर्घकालिक और बढ़ती बिजली आवश्यकता को सुरक्षित करना है।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में जारी माॅडल बिडिंग डाक्यूमेंट एक सामान्य मॉडल दस्तावेज है। प्रत्येक विद्युत परियोजना की तकनीक, स्थान, ईंधन की उपलब्धता, परिवहन लागत तथा अन्य परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। इसी कारण निविदा प्रक्रिया के दौरान बोलीदाताओं से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का तकनीकी एवं व्यावहारिक दृष्टि से परीक्षण किया गया। आवश्यक प्रस्तावित बदलावों को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा गया और आयोग द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श के बाद आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई।
डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि यह धारणा भी सही नहीं है कि बिजली खरीद का कार्य बिना प्रतिस्पर्धा के किसी एक कंपनी को दिया जा रहा है। अंतिम चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के दौरान प्राप्त कुल टैरिफ के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 1320 मेगावाट बिजली की व्यवस्था राज्य की दीर्घकालिक बेस-लोड आवश्यकता को ध्यान में रखकर प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य भविष्य में राज्य के उपभोक्ताओं को लगातार, पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि उत्तराखंड पर्यटन एवं तीर्थाटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य होने के साथ-साथ पर्यावरणीय रूप से भी संवेदनशील है। थर्मल पावर प्लांट के लिए बड़ी मात्रा में कोयले की आवश्यकता होती है। कोयले को लंबी दूरी तक पहुंचाने पर परिवहन लागत भी बढ़ सकती है। इसलिए निविदा में संयंत्र को देश में किसी भी उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने का विकल्प रखा गया है, ताकि कंपनियां ईंधन की उपलब्धता, परिवहन लागत और अन्य व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धी दर प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में संयंत्र स्थापित करने पर कोई रोक नहीं है। यदि कोई कंपनी उत्तराखंड में संयंत्र स्थापित कर प्रतिस्पर्धी दर पर बिजली उपलब्ध कराती है, तो वह भी निर्धारित प्रक्रिया में भाग ले सकती है।
डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि बिजली जिस स्थान पर उत्पादित होगी, वहां से उत्तराखंड तक बिजली पहुंचाने के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन व्यवस्था और उससे संबंधित लागत निविदा तथा टैरिफ की निर्धारित शर्तों के अनुसार तय होगी। इसलिए केवल यह कहना कि यदि संयंत्र किसी अन्य राज्य में स्थापित हुआ तो पूरा अतिरिक्त खर्च उत्तराखंड के उपभोक्ताओं पर आएगा, अपने आप में सही निष्कर्ष नहीं है। उपभोक्ताओं पर वास्तविक वित्तीय प्रभाव का आकलन कुल बिजली टैरिफ के आधार पर ही किया जाएगा।