रुद्रप्रयाग। राज्य मिलेट मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और खरीफ क्रय वर्ष 2026 के अंतर्गत मंडुवा सहित अन्य पौष्टिक अनाजों की खरीद में तेजी लाने के लिए सहकारिता और कृषि विभाग ने रणनीति तैयार की है। इसके तहत किसानों को अपनी उपज बेचने में होने वाली परेशानियों को दूर करने और खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया। स्वयं सहायता समूहों एवं अन्य पात्र किसान समूहों के माध्यम से मंडुवा खरीद की व्यवस्था को सुविधाजनक बनाने के सुझाव पर भी चर्चा की गई।
इस संबंध में उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ लिमिटेड (यूसीएफ) के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला, यूसीएफ के वरिष्ठ अधिकारी सुशील तिवारी और रुद्रप्रयाग के मुख्य कृषि अधिकारी के बीच विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बैठक में किसानों की व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार किया गया।
बैठक में बताया गया कि खरीफ क्रय वर्ष 2026 के अंतर्गत सहकारिता विभाग द्वारा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से विभिन्न फसलों की खरीद निर्धारित दरों पर की जाएगी। इसके तहत मंडुवा का क्रय मूल्य 52.05 रुपये प्रति किलोग्राम, झंगोरा का 35 रुपये, सोयाबीन का 45 रुपये और रामदाना का 55 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। निर्धारित दरों पर उपज की खरीद से किसानों को अपनी फसलों के विक्रय के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बैठक में मुख्य कृषि अधिकारी ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में पैक्स के माध्यम से समूह के नाम पर मंडुवा की खरीद नहीं हो रही है। इसके कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए व्यक्तिगत रूप से पैक्स कार्यालय पहुंचना पड़ता है। जनपद के अनेक किसान सीमित कृषि संसाधनों और दैनिक कार्यों में व्यस्त रहने के कारण इसके लिए अलग से समय नहीं निकाल पाते हैं।
विशेष रूप से सीमांत किसानों के पास कई बार बिक्री के लिए केवल 40 से 50 किलोग्राम मंडुवा उपलब्ध होता है। इतनी कम मात्रा बेचने के लिए उन्हें 20 से 30 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। इससे किसानों का समय और धन खर्च होता है। इस परेशानी के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती है।
मुख्य कृषि अधिकारी ने सुझाव दिया कि पिछले वर्ष की भांति स्वयं सहायता समूहों और अन्य पात्र किसान समूहों के माध्यम से मंडुवा खरीद की व्यवस्था की जाए। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर स्थित पैक्स कार्यालयों तक बार-बार नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही, समूहों के माध्यम से उपज एकत्रित होने से खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने में भी सहायता मिलेगी।
इस सुझाव पर यूसीएफ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला ने कहा कि संबंधित समूह के अध्यक्ष और सचिव अपने सदस्यों से मंडुवा एकत्रित कर प्रत्येक किसान का नाम, बैंक खाते का विवरण और बिक्री के लिए उपलब्ध उपज की मात्रा सहित एक समेकित सूची तैयार करें। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समूह के माध्यम से खरीद किए जाने पर प्रत्येक किसान को उसकी ओर से उपलब्ध कराई गई उपज के अनुरूप भुगतान सीधे उसके बैंक खाते में किया जा सकेगा।
समूह आधारित खरीद व्यवस्था से छोटे और सीमांत किसानों को राहत मिलने के साथ उपज के संग्रहण एवं खरीद कार्य को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। इससे अधिकाधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने और राज्य मिलेट मिशन के लक्ष्यों को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी। बैठक में किसानों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए सहकारिता विभाग, पैक्स, कृषि विभाग और किसान समूहों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। उद्देश्य है कि खरीफ क्रय वर्ष 2026 के दौरान मंडुवा और अन्य पौष्टिक फसलों की खरीद ें तेजी लाई जाए तथा जनपद के अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सके।